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how to change your destiny.? अपनी किस्मत को कैसे बदले?

how to change your destiny.?
अपनी किस्मत को कैसे बदले?



how to change your destiny,what is a destiny

how to change your destiny. 

तो सबसे पहले सवाल ये आता है कि किस्मत होती क्या है?

 What is a destiny?


how to change your destiny सीधे और आसान तरीके से कहें तो कल या आने वाले टाइम में हमारे साथ जो होने वाला है या जो होगा उसे कहते हैं किस्मत और बहुत सारे लोगों का यह कहना है कि किस्मत पहले से लिखी हुई होती है जो लिखा हुआ होता है वही होगा आगे चलकर


तो practical तरीके से सोचो तो आप आज जो भी काम कर रहे हो उसी का result आपको कल मिलेगा


अगर आप आज कोई छोटी-मोटी नौकरी कर रहे हो और आपकी salary 10 या 20 हजार है और आने वाले कई सालों तक अगर आप वही नौकरी करते रहोगे तो practically आप कभी भी कोई बड़ा सा घर या बड़ी सी गाड़ी नहीं खरीद सकते सीधी सी बात है

तो इसका मतलब यह हुआ कि आपने खुद ही अपनी किस्मत लिख दी
आपको अगर अपना आने वाले  टाइम में अपनी किस्मत बदल नी है तो आपको आज action लेना पड़ेगा आपको नौकरी छोड़कर कोई बिजनेस या कोई स्टार्टअप चालू करना पड़ेगा जिससे आपके income बढ़ेगी और आने वाले टाइम में आपकी किस्मत भी बदल जाएगी


तो सीधी सी भाषा में कहें तो आप आज जो भी काम कर रहे हो या जो भी एक्शंस लेते हो उसी के हिसाब से आपका कल जो है वह decide होता है मतलब की हार्ड वर्क और मेहनत से बड़ी दुनिया में कोई चीज नहीं होतीमेहनत ,कोशिश और दिमाग एनसे आप दुनिया में कुछ भी हासिल कर सकते हैं

how to change your destiny





किस्मत से ही related आज हम आपको एक स्टोरी सुनाते हैं
यह स्टोरी सुनने के बाद आप sure हो जाओगे कि दुनिया में मेहनत और hard work से बड़ी कोई चीज नहीं होती


यह स्टोरी महादेव ,यमराज और ऋषि मार्कंडेय की है

आपने शायद ऋषि मार्कंडेय का नाम सुना होगा उन्होंने ही महामृत्युंजय मंत्र बनाया था

ऋषि मार्कंडेय के जन्म से  पहले उनके माता-पिता को कोई संतान नहीं हो रही थी

तो उनके माता-पिता ने महादेव भगवान शिव की तपस्या की और बहुत सालों बाद महादेव ने प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए

और महादेव ने कहा कि आपकी किस्मत में संतान का सुख नहीं लिखा है


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तो आप कुछ और मांग लीजिए
लेकिन उनके माता-पिता ने कहा कि नहीं भगवान हमें  सिर्फ और सिर्फ संतान ही चाहिए और इसीलिए हमने इतने सालों से  आपकी तपस्या की है हमें इसके सिवा और कुछ नहीं चाहिए
महादेव ने कहा ठीक है संतान सुख आपके भाग्य में नहीं लिखा लेकिन आपने इतनी मेहनत की है इतने सालों तक तपस्या की है और आपको इसके सिवा और कुछ नहीं चाहिए तो मैं यह वरदान देने के लिए तैयार हूं

में आपको दो विकल्प देता हूं
 आप बताइए के आपको इन दोनों में से कैसी संतान चाहिए

1  यह  बच्चा बहुत ही महान बहुत ही बुद्धिमान और सर्वगुण संपन्न होगा अपने जीवन में जो कुछ भी चाहता है वह सब हासिल कर सकेगा


लेकिन इसकी उम्र सिर्फ 10 साल ही होगी यह सिर्फ 10 साल तक ही जिंदा रह पाएगा और इतनी उम्र में वह अपने सारे लक्ष्य को हासिल कर लेगा उसके बाद उसकी मृत्यु हो जाएगी

2 और दूसरा बच्चा मानसिक रूप से कमजोर होगा मंदबुद्धि होगा उसकी सोचने की क्षमता भी बहुत कम होगी
वह अपने पूरे जीवन में कुछ भी बड़ा नहीं कर पाएगा और उसके जीवन का कोई लक्ष्य भी नहीं होगा
लेकिन उसकी जो उम्र होगी वह 100 साल से ऊपर की होगी वह कम से कम 100 साल तक जी पाएगा उससे पहले उसकी मृत्यु नहीं होगी

अब आप बताइए आपको इन दोनों में से कैसी संतान चाहिए

तो मारकंडे के माता पिता ने बहुत सोचने के बाद कहा कि ऐसी संतान का क्या फायदा जिसके जीवन का कोई लक्ष्य ही ना हो
हमें बुद्धिमान संतान चाहिए भले ही उसकी उम्र 10 साल हो

उसके बाद महादेव ने वरदान दे दिया और उनको संतान प्राप्त हो गया

और जैसा कि महादेव ने कहा था उस बच्चे ने अपनी 9 साल की उम्र में वेद, शास्त्र, उपनिषद, पुराण इन सब का सारा का सारा ज्ञान उसको सिर्फ 9 साल की उम्र में ही हो गया और वह बहुत ही बुद्धिमान था
क्योंकि वह बहुत ही बुद्धिमान था तो उसने देख लिया कि उसके माता-पिता बहुत ही दुखी रहने लगे थे तो उसने पूछा कि आप इतने दुखी क्यों है   कुछ दिनों से

तो उनके माता-पिता ने बताया कि बहुत ही जल्द तुम्हारी मृत्यु होने वाली है और यही हमारे दुख का कारण है

फिर उस बच्चे ने यह सुनकर अपने माता पिता से कहा कि यही आपके दुख का कारण है तो मैं आपके इस दुख का निवारण जरूर करूंगा

क्योंकि वह बच्चा महा ज्ञानी था उसको दुनिया का सारा ज्ञान था
 तो वह यह चीज जानता था की कर्म से आप अपने भाग्य को बदल सकते हो

अगर आप मेहनत करते हो तो दुनिया की कोई भी चीज आप हासिल कर सकते हो भले ही वह आपके भाग्य में ना हो फिर भी

फिर उसने 1 साल तक महादेव की बहुत ही कठिन तपस्या की और महादेव को प्रसन्न कर लिया तब तक वह 10 साल का हो चुका था और उसके बाद यमराज आ गए उनके प्राण लेने के लिए जैसे ही यमराज ने उनके प्राण ले जाने चाहे तो महादेव प्रकट हो गए

और महादेव ने कहा कि यह 1 साल से मेरी तपस्या कर रहा था और यह मेरा भक्त है

तो आप इसे जीवनदान दे और यमराज ने उनके प्राण नहीं लिए और उसके बाद मार्कंडेय ऋषि हजारों सालों तक जिए


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सोचिए अगर उस बच्चे की जगह कोई और होता तो यह मानकर बैठ जाता कि मेरे भाग्य में नहीं है जब खुद भगवान ने कहा है कि मैं 10 साल तक ही जिऊंगा तो मैं क्या कर सकता हूं

लेकिन उसने ऐसा नहीं सोचा अपने कर्म से अपने भाग्य को बदल दिया

उसके मां-बाप के भाग्य में संतान सुख नहीं था फिर भी कर्म से तपस्या करके उन्होंने अपने भाग्य को बदल दिया
मार्कंडेय ऋषि की उम्र जन्म से पहले ही तय थी कि वह 10 साल ही जिएंगे लेकिन फिर भी उन्होंने तपस्या से कर्म से अपने भाग्य को बदल दिया

सीधी भाषा में कहें तो इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि चाहे आपके भाग्य में कुछ हो या ना हो लेकिन अगर आप hard working है


कुछ बड़ा करने की सोच रखते हैं और लगातार बिना हिम्मत हारे करते रहते हैं तो दुनिया की कोई भी चीज आप हासिल कर सकते हैं और अपने भाग्य को बदल सकते हैं


You can change your destiny by working hard

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